Sunday, 18 July 2010

अब बोकारो में ऑनर किलिंग .....

झारखंड में कोडरमा की रहनेवाली पत्रकार निपमा की मौत का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि बोकारो में भी ऑनर किलिंग की घटना दोहरायी गयी.
12 वीं का छात्र विराट विद्या उर्फ गोलू की उसकी प्रेमिका के भाइयों ने मिल कर हत्या कर दी. पुलिस ने गोलू की प्रेमिका नुपूर के चारों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है. चारों भाई राकेश कुमारमिंटू बाउरीविक्रांत जैकी व रवि ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है.

बोकारो में पढ़ाई करता था
गोलू चिकित्सक डॉ एम लाल के सेक्टर चार थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर चार सी/
2030 आवास में रह कर पढ़ाई करता था. वह बेगूसराय (बिहार) का मूल निवासी था.  गोलू के पिता कोडरमा में बैंक ऑफ़ इंडिया में हैं. शनिवार सुबह इसी आवास से उसका शव मिला. शरीर पर चोट के निशान थे. सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. जांच के दौरान मामला प्रेम प्रसंग का पाया गया.

सेक्टर चार थाना पुलिस ने उसकी प्रेमिका नुपूर के चारों भाइयों को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पुलिस के अनुसार
नुपूर के भाइयों ने पीट-पीट कर गोलू को मार डाला. नुपूर के सामने ही गोलू की पिटाई की गयी. बचाने गयी नुपूर को भी उसके भाइयों ने पीटा. चारों को चास जेल भेज दिया गया है.

मामा और मामी पहुंचे
सूचना मिलने के बाद गोलू के मामा हजारीबाग में पुलिस लाइन के मेजर राजीव कुमार अपनी पत्नी के साथ बोकारो पहुंचे. उन्होंने सेक्टर चार थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. प्राथमिकी में राकेश कुमार बाउरी
विक्रांत उर्फ जैकीरवि बाउरी व मिंटू बाउरी को नामजद अभियु बनाया गया है.
('प्रभात खबर' के सौजन्‍य से)

Monday, 12 July 2010

रोहन में बीज डालने के बाद फसल में कीड़े नहीं लगते है !!

बोकारो जिले के कसमारपेटरवार और जरीडीह समेत आस-पास के क्षेत्र में मंडरा रही दुर्भिक्ष की काली छाया को देख कर किसानोंमजदूरों एवं आम जनता में त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. खेती किसानी की परंपरागत तकनीक पर विश्वास करें,तो रोहन यानी रोहिनी नक्षत्र के प्रवेश करते ही किसान अपने-अपने खेतों में धान के बीज डाल देते थे. इसमें यह मान्यता है कि रोहन में बीज डालने के बाद फसल में कीड़े नहीं लगते है. पिछले कई वषरे से लगातार सुखाड़ की मार ङोल कर किसानों की कमर टूट चुकी है.

इस वर्ष भी  स्थिति कुछ ऐसी ही है. मॉनसून का प्रवेश तो धमाकेदार हुआ
लेकिन दो दिन बूंदा-बांदी कर ऐसा रुठा कि वापस आने का नाम ही नहीं ले रहा है. गांव में किसान रोज पूजा-पाठ कर  इंद्र भगवान को प्रसन्न करने की कोशिश में  जुटे है. बारिश भले ही न हो,लेकिन बादल रोज आसमान में उमड़ रहे है. इधर देर-सबेर बिहन डालने के बाद धान के बीचड़े जो खेतों में उग आये थे. उसकी हरियाली पर अब धीरे-धीरे पीलापन की परत चढ़ने लगी है. ऐसे में क्षेत्र के किसानों में संशय की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

इसके अलावा इस वर्ष वर्षा के आभाव में एवं तेज गरमी से प्राय सभी परंपरागत सिंचाई के साधन नदी-नाले तालाब
डांडी व कुएं सूख गये है.खत्म हो गये है धान के परंपरागत बीजआज से 15-20 वषरे पूर्व तक जो भी किसान खेती करते थेवो परंपरागत बीजगोबर से बना खाद व खेती-बारी की सारी व्यवस्था पूर्णत देशज विधि पर निर्भर थी.

हाल के वषरे में खेती पर नयी तकनीक व हाइब्रिड के बीजों का समावेश होता गया. वैसे ही हमारे परंपरागत बीज
खाद व देशज पद्धति प्राय समाप्त ही हो गये हैं. खास कर क्षेत्र के किसानों के पास  उस वक्त सौ से अधिक किस्म के धान के बीज बचे थे. लेकिन वर्तमान समय में अब एक भी प्रकार के धान के परंपरागत बीज उनके घरों में नहीं है. आज की खेती किसानी पूर्णत बाजार पर निर्भर है.

खत्म होनेवाले धान के परंपरागत बीज खत्म होनेवाले धान बीजों के  नाम हैं - हथिया साइल
,बाघ पांजरकोया धानडैडकी साइललाल मोटा धानहरदी साइलजोंग धानसोना धूसरी,कारी बाकीगोविंद भोगसमुद्री धानसीता साइलकुमरा साईलझिंटी साइलखैरका खोची,चरकी राइसकरहनीजोनरा साइलमालयर धानप्रसाद भोगबादशाह भोगबरहा साइलकतकी साइलपूर्वी साइल.
(प्रभात खबर के सौजन्‍य से )